I हम jante ki aalu ki buvai ki samay ki jaati hai aur kaise ki jaati Hai
आलू मुख्य रूप से रबी (ठंड) के मौसम की फसल है। इसकी बुवाई का सही समय क्षेत्र और आलू की किस्म पर निर्भर करता है, लेकिन मुख्य रूप से यह सितंबर के अंत से लेकर नवंबर के पहले सप्ताह तक बोया जाता है।
यहाँ आलू की खेती से जुड़ी पूरी जानकारी दी गई है:
1. आलू की बुवाई का सही समय
मैदानी क्षेत्रों में आलू की बुवाई का समय इस प्रकार होता है:
फसल का प्रकार बुवाई का उपयुक्त महीना अवधि (लगभग)
अगेती फसल सितंबर का मध्य (15 से 25 सितंबर) 60-70 दिन
मुख्य फसल अक्टूबर का मध्य (15 से 25 अक्टूबर) 90-110 दिन
पछेती फसल नवंबर का मध्य (15 से 25 नवंबर) 110-120 दिन
तापमान: आलू ठंडी जलवायु की फसल है। कंद (आलू) के विकास के लिए 17
∘
C से 19
∘
C का तापमान सबसे अच्छा माना जाता है। इससे अधिक तापमान होने पर कंदों का विकास रुक जाता है।
2. आलू की खेती में लगने वाली मुख्य चीजें (खाद और उर्वरक)
आलू की अच्छी पैदावार और गुणवत्ता के लिए मिट्टी के परीक्षण के आधार पर खाद डालना सबसे अच्छा होता है, लेकिन सामान्य तौर पर प्रति हेक्टेयर निम्नलिखित उर्वरकों की आवश्यकता होती है:
उर्वरक (Nutrient) मात्रा (प्रति हेक्टेयर) उपयोग का तरीका
गोबर की खाद 20 से 25 टन बुवाई से लगभग एक महीने पहले खेत की तैयारी के दौरान मिट्टी में अच्छी तरह मिला दें।
नाइट्रोजन (N) 120-150 किलोग्राम आधी मात्रा फास्फोरस और पोटाश के साथ बुवाई के समय डालें। बची हुई आधी मात्रा बुवाई के 30 से 35 दिन बाद, मिट्टी चढ़ाने (अर्थिंग अप) के समय दें।
फास्फोरस (P) 80-100 किलोग्राम पूरी मात्रा बुवाई के समय डालें। (यह DAP या सिंगल सुपर फास्फेट के रूप में दिया जाता है)।
पोटाश (K) 80-100 किलोग्राम पूरी मात्रा बुवाई के समय डालें। (यह म्यूरेट ऑफ पोटाश (MOP) के रूप में दिया जाता है)।
अन्य महत्वपूर्ण चीज़ें:
बीज: रोग-मुक्त, स्वस्थ और प्रमाणित आलू के कंदों का इस्तेमाल करें। आलू का भार 40-50 ग्राम होना चाहिए।
सूक्ष्म पोषक तत्व: जिंक, बोरॉन आदि की कमी होने पर जिंक सल्फेट (लगभग 25 किग्रा प्रति हेक्टेयर) का प्रयोग किया जाता है, या फिर 40 और 60 दिन की फसल पर सूक्ष्म पोषक तत्वों का घोल बनाकर छिड़काव किया जाता है।
खरपतवार नाशक: खरपतवार नियंत्रण के लिए बुवाई के तुरंत बाद, लेकिन अंकुरण से पहले, मैट्रिब्यूजिन या पेंडीमेथालिन जैसे खरपतवार नाशकों का छिड़काव किया जाता है।
3. खेत की तैयारी और बुवाई की विधि
खेत की तैयारी: मिट्टी को 20−25 सेंटीमीटर गहरा करके 2-3 बार जुताई करें। मिट्टी को भुरभुरा बनाना बहुत ज़रूरी है। अंतिम जुताई के समय गोबर की खाद मिला दें।
बीज उपचार: बुवाई से पहले बीज आलू को फफूंदीनाशक (जैसे मैंकोजेब) से उपचारित करना चाहिए ताकि कंद सड़न और अन्य रोगों से बचा जा सके।
बुवाई:
आलू की बुवाई सामान्यतः मेड़ों (ridges) पर की जाती है।
लाइन से लाइन की दूरी: 50 से 60 सेंटीमीटर।
पौधे से पौधे (या बीज से बीज) की दूरी: 15 से 20 सेंटीमीटर।
बीज की गहराई: 5 से 7 सेंटीमीटर।
मिट्टी चढ़ाना (Earthing Up): बुवाई के लगभग 30-35 दिन बाद जब पौधे 15−20 सेंटीमीटर के हो जाएं, तब यूरिया की बची हुई मात्रा देकर मेड़ों पर मिट्टी चढ़ाई जाती है। यह कंदों को
धूप से बचाता है और उनके विकास में मदद करता है।

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