राधा कृष्ण के कैसे मिलन हुआ

 

राधा और कृष्ण का मिलन केवल एक घटना नहीं, बल्कि उनकी संपूर्ण लीला और प्रेम कथा का सार है। उनके मिलन को तीन मुख्य चरणों में समझा जा सकता है:


1. प्रथम और अलौकिक मिलन (भांडीर वन)

राधा और कृष्ण का पहला और सबसे महत्वपूर्ण मिलन बाल्यकाल में हुआ था, जिसे एक अलौकिक घटना माना जाता है:


कब: जब श्रीकृष्ण बहुत छोटे बालक थे (कुछ कथाओं के अनुसार लगभग 5-6 वर्ष के)।


कहाँ: भांडीर वन (वृंदावन क्षेत्र में) में।


कैसे:


पौराणिक ग्रंथों, जैसे गर्ग संहिता और ब्रह्मवैवर्त पुराण के अनुसार, एक बार नंद बाबा बालक कृष्ण को लेकर भांडीर वन से जा रहे थे।


अचानक, मौसम खराब हो गया और घनघोर आँधी-तूफान आने लगा।


इस बीच, एक दिव्य ज्योति प्रकट हुई, जिससे राधा रानी दिखाई दीं। नंद बाबा ने बालक कृष्ण को राधा की गोद में सौंप दिया।


राधा रानी के स्पर्श से बालक कृष्ण ने तुरंत बाल रूप त्यागकर किशोर रूप धारण कर लिया।


उसी क्षण, स्वयं ब्रह्मा जी वहाँ प्रकट हुए और उन्होंने वैदिक मंत्रों के साथ राधा और कृष्ण का विवाह (गंधर्व विवाह) करवाया।


विवाह संपन्न होने के बाद, कृष्ण पुनः बाल रूप में आ गए और राधा ने उन्हें नंद बाबा को सौंप दिया, और योगमाया ने इस घटना को सभी की स्मृति से हटा दिया।


महत्व: यह मिलन उनके शाश्वत, दैवीय और पूर्व निर्धारित प्रेम बंधन को स्थापित करता है। यह मिलन लौकिक नहीं, बल्कि आत्मिक और पूर्ण था।


2. बचपन की लीलाओं में लौकिक मिलन (संकेत)

उनका लौकिक (दुनियावी) मिलन उनकी बाल लीलाओं के दौरान अनगिनत बार हुआ:


कब: बाल्यकाल से लेकर कृष्ण के लगभग 10-11 वर्ष की आयु तक, जब तक उन्होंने वृंदावन नहीं छोड़ा।


कहाँ: बरसाना और नंदगाँव के बीच स्थित 'संकेत वन' में, वृंदावन की कुंज गलियों में, यमुना तट पर और गोवर्धन पर्वत के आसपास।


कैसे: यह मिलन कृष्ण की मधुर बाँसुरी की धुन पर होता था। राधा, कृष्ण के प्रति अपने निस्वार्थ प्रेम और भक्ति के कारण खींची चली आती थीं। इस दौरान उन्होंने रासलीला, मान-मनुहार, और प्रेम की अनगिनत मधुर लीलाएं कीं।


महत्व: यह मिलन सांसारिक होते हुए भी, शुद्ध, निष्काम प्रेम की पराकाष्ठा थी।


3. अंतिम और वियोगी मिलन (कुरुक्षेत्र)

कृष्ण के वृंदावन छोड़ने के बाद उनका मिलन अत्यंत दुर्लभ हो गया, लेकिन अंतिम महत्त्वपूर्ण मिलन हुआ:


कब: कई वर्षों के वियोग के बाद, कृष्ण के राजा बनने के उपरांत।


कहाँ: कुरुक्षेत्र के ब्रह्मसरोवर तट पर (सूर्य ग्रहण के अवसर पर)।


कैसे: श्रीमद्भागवत पुराण के अनुसार, सूर्य ग्रहण के अवसर पर जब सभी ब्रजवासी (नंद, यशोदा, राधा, गोपियाँ) और कृष्ण (द्वारका से) अपने परिवार के साथ कुरुक्षेत्र में एकत्रित हुए थे, तब उनका पुनर्मिलन हुआ था। यह मिलन प्रेम, वियोग और मिलन की भावनाओं से भरा था। ब्रजवासियों और राधा ने कृष्ण से वृंदावन वापस आने का आग्रह किया, लेकिन कृष्ण कर्मयोग के कारण द्वारका वापस चले गए।


महत्व: यह मिलन दर्शाता है कि उनका प्रेम भौतिक उपस्थिति पर निर्भर नहीं था। यह अंतिम मिलन राधा के आध्यात्मिक प्रेम की विजय थी, जहाँ वह कृष्ण को पाकर भी केवल उन्हें देखकर संतुष्ट थीं।


संक्षेप में, राधा-कृष्ण का मिलन एक समय-सीमा में बंधा नहीं है, यह प्रेम की शाश्वत धारा है जो समय के हर क्षण में बहती है। उनका सबसे महत्वपूर्ण मिलन भांडीर वन में अलौकिक विवाह के रूप में हुआ था,

 जिसने उनके दिव्य प्रेम को स्थापित किया।








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